जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने गुरुवार को निलंबित आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा को अंतरिम राहत देते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़े रिश्वत मामले में उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति सुदेश बंसल की बेंच ने सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि पहले इसी मामले में एक और आरोपी अधिकारी, आरएएस अधिकारी पुष्कर मित्तल के निलंबन को भी रोका गया था और पिंकी मीणा का मामला उसी आधार पर है। अदालत ने सस्पेंशन रिव्यू कमेटी की समीक्षा को खारिज करते हुए कहा कि पिंकी मीणा के निलंबन को जारी रखने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।
याचिकाकर्ता पिंकी मीणा 15 जनवरी 2021 से सस्पेंशन पर हैं और अब तक लगभग पांच साल हो चुके हैं। इस अवधि में उनके खिलाफ चार्जशीट विभागीय जांच के बाद प्रस्तुत की गई है। अदालत ने पक्षकारों के बीच समानता बनाए रखने के लिए कहा कि निलंबन पर रोक लगाना जरूरी है।
याचिकाकर्ता के वकील विपुल सिंघवी और आदेश अरोड़ा ने कोर्ट में दलील दी कि सरकारी सेवा नियमों के अनुसार सस्पेंशन केवल एक अस्थायी एवं एहतियाती कदम होता है, ताकि जांच प्रक्रिया को बाधित होने से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक अधिकारी को साढ़े पांच वर्षों से अधिक समय तक सस्पेंशन पर रखना सेवा नियमों के खिलाफ है और उसे सजा की तरह ही माना जाता है।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और राज्य सरकार द्वारा अभियोजन की मंजूरी मिली हुई है, जिससे अब अधिकारी पर गवाहों को प्रभावित करने या सबूत छेड़छाड़ करने का कोई खतरा नहीं रह गया है।
यह मामला जनवरी 2021 का है और दौसा जिले के दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां आरोप है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण और निर्माण की रुकावटों को दूर करने के लिए रिश्वत मांग की थी।
एसीबी के अनुसार 13 जनवरी 2021 को पिंकी मीणा को गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह बांदीकुई की एसडीएम थीं और उन पर कथित तौर पर 10 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप था। साथ ही पुष्कर मित्तल, जो उस समय दौसा के एसडीएम थे, उनसे 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई।
पिंकी मीणा की गिरफ्तारी ने खूब तहलका मचाया क्योंकि यह उनकी शादी से कुछ ही दिन पहले हुई थी। हाई कोर्ट ने उन्हें शादी की रस्मों में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। शादी के बाद उन्होंने अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया था।
सरकारी जांच पूरी होने और चालान दाखिल होने के बाद राज्य सरकार ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी भी दे दी है। अब मामला न्यायालय में प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगा।

