यह सफेद पत्र नहीं, खाली पत्र है, कहता है पूर्व तमिलनाडु वित्त मंत्री थांगम थेननारसू

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    पूर्व तमिलनाडु वित्त मंत्री थांगम थेननारसू ने सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई ‘सफेद पत्र’ पर तीखा हमला किया है। उनका कहना है कि यह दस्तावेज़ प्रशासनिक दक्षता की कमी और जनता को दिए गए वादों को पूरा करने में असमर्थता छिपाने का एक माध्यम मात्र है।

    थेननारसू ने कहा कि ‘सफेद पत्र’ नाम के इस दस्तावेज के पीछे छुपे वास्तविक कारणों को जनता को समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के दस्तावेज़ का मकसद सिर्फ तथ्यों को छुपाना और प्रशासन की विफलताओं को नजरअंदाज करना है। इसके द्वारा सरकार ने खुद अपने कामकाज की विफलता स्वीकार की है, लेकिन साथ ही इसे कलात्मक तरीके से छिपाने का प्रयास भी किया गया है।

    पूर्व मंत्री ने बताया कि सरकार ने चुनावी वादों के तहत कई महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रस्तुत की थीं, जिनका चुनाव के बाद ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। ‘‘सफेद पत्र’’ जारी कर सरकार ने यह दिखाने की कोशिश की है जैसे उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां पूरी की हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिलकुल अलग है।

    उन्होंने कहा कि प्रशासनिक नाकामी को स्वीकार करना और उससे सीख लेना एक बेहतर कदम होता। मगर इसके बजाय, सरकार ने ‘सफेद पत्र’ के माध्यम से जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है। यह नीति निर्माताओं और अधिकारियों की अप्रभावीता का प्रतिबिंब है, जो जिम्मेदारियों को टालने के लिए नजरअंदाज किए गए मुद्दों को छुपाने में लग गए हैं।

    थांगम थेननारसू ने जनता से अपील की है कि वे इस दस्तावेज को गंभीरता से लें और सरकार से स्पष्टता मांगें कि वादे पूरे करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना चाहिए और जनता के हित में काम करना चाहिए, न कि मसलन ‘सफेद पत्र’ जैसे दस्तावेज़ों की आड़ लेकर अपनी कमजोरियां छुपाना।

    तमीळनाडु के राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भी इस बयान की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार की पारदर्शिता और आलोचना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत है, जो अंततः बेहतर प्रशासन के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।

    इस विवाद के बीच, जनता के बीच भी इस ‘सफेद पत्र’ की प्रामाणिकता और उसके पीछे छुपे वास्तविक मकसद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में जिम्मेदार अधिकारियों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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