नई दिल्ली/लखनऊ। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में वृद्धि के बाद विपक्षी दल केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साध रहे हैं। भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है। इस बढ़ोतरी ने आम जनता के बजट पर एक नया दबाव डाल दिया है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज में सरकार पर प्रहार किया। उन्होंने लिखा, “रोटी के महंगे होने से थाली गई रूठ, भाजपा से अब तो, हर आस गई टूट।” उनका यह बयान भाजपा की बढ़ती महंगाई और जनता पर आर्थिक बोझ को दर्शाता है। वहीं, कांग्रेस ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए लिखा कि यह महंगाई बढ़ाने का एक और तरीका है, जिससे आम आदमी की जेब लगातार खाली होती जा रही है।
सरकारी तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपए की वृद्धि की घोषणा की है। इसके बाद दिल्ली में एक सिलेंडर की कीमत 913 रुपए से बढ़कर 942 रुपए तक पहुंच गई है। यह नया दाम 7 जून से लागू हो गया है। इससे पहले जून की शुरुआत में कमर्शियल उपयोग के लिए 19 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की कीमत भी बढ़ाई गई थी, जो आर्थिक रूप से व्यवसायिक क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
पिछले कुछ महीनों में घरेलू और कमर्शियल दोनों प्रकार के एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है। फरवरी में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 49 रुपए की वृद्धि हुई थी, जबकि मार्च में इसे 115 रुपए बढ़ाया गया था। इसका असर व्यापारिक गतिविधियों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। मई से लागू चार विभिन्न संशोधनों के तहत सीएनजी की कीमतों में कुल 6 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई जिससे सार्वजनिक परिवहन एवं निजी वाहनों के ईंधन पर भी असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें सीधे तौर पर महंगाई दर को बढ़ावा देती हैं, जिससे आम आदमी की जीवन जगत प्रभावित होता है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन जनता की जुबान पर महंगाई और जीवन यापन की कठिनाइयों की चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि सरकार की यह आर्थिक नीति जल्द ही सामाजिक-राजनीतिक असंतोष को जन्म दे सकती है।

