सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब के परिसर में स्थित नौ अन्य स्मारकों के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इन स्मारकों के आस-पास 20 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस आदेश को फिलहाल कायम करते हुए कोर्ट ने इसे कुछ समय के लिए स्थगित रखा है, ताकि सभी पक्ष उचित रूप से अपनी बात रख सकें।
यह निर्णय दिल्ली गोल्फ क्लब में मौजूद संरचनाओं और ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा को लेकर लिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 100 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई नई संरचना या निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा, जिसे 22 जुलाई तक के लिए रोक दिया गया है। इसके साथ ही, नौ किसी अन्य स्मारकों के 20 मीटर के दायरे में भी कोई गतिविधि निषिद्ध रहेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के पक्ष में माना जा रहा है।
इस मामले में विभिन्न पक्षों द्वारा याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें दिल्ली गोल्फ क्लब की भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना है और पर्यावरण तथा सांस्कृतिक संरक्षण की प्राथमिकता के मद्देनजर यह आदेश दिया है। कोर्ट का यह स्थगन आदेश इस बात का संकेत है कि मामले की गहन समीक्षा जारी है और अंतिम निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगेगी।
वहीं, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को भी इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया है ताकि निर्देशों का उल्लंघन न हो। दिल्ली में स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है, जब कोर्ट इस आदेश के स्थगित होने पर पुनः विचार करेगा।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय न्यायपालिका अपने सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहरों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपना रही है। सभी संबंधित पक्ष और नागरिक इस आदेश का सम्मान करें, जिससे कि हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।

