प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने पिता की आपातकाल के दौरान भूमिगत रहने की 19 महीने की याद ताजा की। यह भावुक अवसर उनके पिता की 92वीं जयंती पर आयोजित चौथे स्मरण व्याख्यान में आया। उन्होंने कहा कि यह कठिन समय हमारे लोकतंत्र के लिए एक चुनौती थी, जिसमें कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने विचारों के कारण दमन का सामना करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि उनके पिता पिछले दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा अग्रसर रहे और आपातकाल के दौरान उनकी भूमिगत स्थिति इस भावना का परिचायक थी। इस दौरान उन्होंने गलतफहमियों और अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और स्वतंत्रता तथा न्याय के लिए संघर्ष किया।
व्याख्यान में यह भी चर्चा हुई कि उस समय कई राजनीतिक कार्यकर्ता सरकार की वादाखिलाफी और संविधानिक अधिकारों की अनदेखी से बुरी तरह प्रभावित हुए। प्रदेश भाजपा प्रमुख ने कहा कि यह पीड़ा और त्याग वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को लोकतंत्र के महत्व को समझाने का माध्यम है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे लोकतंत्र की रक्षा एवं सक्रिय नागरिकता में भूमिका निभाएं ताकि किसी भी स्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर न होने दिया जाए। आपातकाल के अनुभव से मिली सीख को ना केवल याद रखा जाना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय एकता व स्वतंत्रता के प्रति निष्ठा भी प्रदर्शित करनी चाहिए।
समारोह में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी आपातकाल के अंधकारमय दिनों में संघर्षरत नेताओं के साहस और देशभक्ति को याद करते हुए उनकी अमूल्य सेवा को सम्मानित किया। सभी ने इस अवसर पर लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता व्यक्त की।

