इसरो की बड़ी छलांग! NavIC को मजबूत करने के लिए लॉन्च होगा नया उपग्रह NVS-03

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • स्वदेशी परमाणु घड़ी और नए L1 सिग्नल से लैस NVS-03, मोबाइल और नेविगेशन सेवाओं की सटीकता बढ़ने की उम्मीद
  • रक्षा, परिवहन और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत होगी भारत की आत्मनिर्भरता, विदेशी GPS पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद
  • GSLV-F18 रॉकेट से NVS-03 की लॉन्चिंग, भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मिलेगी नई मजबूती

    श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए आज नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को लॉन्च करने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट का उपयोग किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण लॉन्चिंग आज रात 11.52 बजे होगी। भारत के अपने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम यानी नैविक (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) को और अधिक शक्तिशाली, सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
    यह नया सैटेलाइट भारत की दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है, और इसरो की योजना अंतरिक्ष में ऐसे पांच आधुनिक उपग्रहों को स्थापित करने की है। इस उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगाई गई स्वदेशी परमाणु घड़ी है, जो समय का बिल्कुल सटीक हिसाब रखती है। अंतरिक्ष में लोकेशन और नेविगेशन की सटीकता बनाए रखने के लिए समय का सटीक होना सबसे जरूरी होता है। इसके अलावा, पुराने सैटेलाइट्स में मुख्य रूप से मिलने वाले एल5 और एस सिग्नल के साथ-साथ एनवीएस-03 में एक नया एल1 नेविगेशन सिग्नल भी जोड़ा गया है। यही वह सिग्नल है जिसका उपयोग आम जनता के स्मार्टफोन, गाड़ियों के जीपीएस और अन्य रोजमर्रा के नेविगेशन उपकरणों में किया जाता है। इसके जुड़ने से आम नागरिकों को अपने फोन और डिवाइस में बेहद सटीक लोकेशन मिलने लगेगी। यह उन्नत प्रणाली न केवल भारत के भूभाग बल्कि देश की सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर के दायरे तक के क्षेत्र में बेहतरीन नेविगेशन सेवाएं प्रदान करेगी।
    यह मिशन भारत के सामरिक और तकनीकी विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी तक दुनिया भर के लोग मुख्य रूप से अमेरिका के जीपीएस पर निर्भर हैं, जबकि नैविक भारत का अपना स्वतंत्र और स्वदेशी सिस्टम है। इसके संचालन से देश की आंतरिक सुरक्षा, रक्षा बलों, परिवहन और आपातकालीन सेवाओं को किसी भी विदेशी नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। युद्ध या संकट के समय यह हमारी अपनी सुरक्षित प्रणाली देश के बेहद काम आएगी। इस सैटेलाइट के आ जाने से मोबाइल मैपिंग, गाड़ियों की लाइव ट्रैकिंग, ड्रोन संचालन, समुद्री नौवहन, मौसम की सटीक जानकारी और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इसमें इस्तेमाल की गई परमाणु घड़ी जैसी तकनीकों का स्वदेशी होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है और उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास अपनी खुद की स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली मौजूद है।

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