SIR पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर, चुनाव आयोग ने बढ़ाई मतदाता सूची की समयसीमा; लाखों मतदाताओं को राहत

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • दिल्ली समेत कई राज्यों में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा बढ़ी, छूटे हुए मतदाताओं को नाम जुड़वाने का एक और मौका
  • सुप्रीम कोर्ट ने पुराने मतदाताओं के नाम हटाने और फॉर्म-6 भरने पर उठाए थे सवाल, अब 22 दिसंबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और तीखे सवालों के बाद चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट की नसीहत के ठीक एक दिन बाद आयोग ने फॉर्म भरने और अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा बढ़ा दी है। इस फैसले के तहत दिल्ली में चल रही प्रक्रिया की डेडलाइन बढ़ाने के साथ-साथ नागालैंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में भी दावे व आपत्तियां दर्ज कराने की खिड़की फिर से खोल दी गई है, जिससे लाखों छूटे हुए मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है।
    चुनाव आयोग द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए निर्देशों के अनुसार, अब महाराष्ट्र में 13 नवंबर, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में 20 नवंबर, नागालैंड में 25 नवंबर और तेलंगाना में 26 नवंबर तक दावे व आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। वहीं, राजधानी दिल्ली में अब लोग 25 नवंबर तक अपने दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे, जबकि इन पर निपटारे की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। इन सभी राज्यों में अब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 22 दिसंबर को किया जाएगा। इससे पहले विभिन्न राज्यों में यह समयसीमा सितंबर और अक्टूबर के अलग-अलग चरणों में समाप्त हो चुकी थी। यह पूरा बदलाव सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हुई सुनवाई के बाद आया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से सवाल किया था कि जिन नागरिकों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे, उन्हें नाम दोबारा जुड़वाने के लिए नया फॉर्म-6 क्यों भरना पड़ रहा है। अदालत ने मतदान के अधिकार को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आयोग को सलाह दी थी कि वह कोई कठोर समयसीमा तय करने के बजाय उन मतदाताओं के पुराने एसआईआर फॉर्म ही स्वीकार कर ले जिनके नाम मसौदा सूची से हटा दिए गए थे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने इस साल मई महीने में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का तीसरा चरण शुरू किया था, जिसके तहत गणना चरण में फॉर्म न जमा करने वाले मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हटा दिए जाते हैं। हालांकि, अब समयसीमा बढ़ने और प्रक्रिया दोबारा शुरू होने से उन लाखों नागरिकों को सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने का एक और अवसर मिल गया है, जो किन्हीं कारणों से ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल होने से छूट गए थे।

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