देहरादून, राष्ट्रबाण। उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ से लौटते वक्त पांडुकेसर की पहाड़ियों पर हुए भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू अभियान से जुड़ी बड़ी अपडेट सामने आई है। दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश में सभी शवों की शिनाख्त पूरी हो चुकी है, जिसके बाद उन्हें उनके संबंधित परिजनों को सौंप दिया गया है। इस अत्यंत दुर्गम और जोखिमपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें और विवरण झकझोर देने वाले हैं।
24 घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद पहुँचा जा सका घटनास्थल
हादसा कितना भयानक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भौगोलिक परिस्थितियों और रास्तों के पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण बचाव दलों को दुर्घटनास्थल तक पहुँचने में पूरे 24 घंटे का समय लग गया। बदरीनाथ क्षेत्र से लौटते समय हेलीकॉप्टर पांडुकेसर के ऊंचे पहाड़ी इलाके में क्रैश हो गया था। ऊंचाई, संकरे रास्ते और विषम मौसम के चलते तत्काल राहत दल मौके पर नहीं पहुँच सके। हालांकि, सूचना मिलते ही शासन-प्रशासन हरकत में आ गया और युद्ध स्तर पर योजना तैयार की गई।
सेना और सुरक्षा बलों का संयुक्त महा-अभियान
इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए देश और राज्य की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर काम किया। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला। दुर्घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति इतनी विकट थी कि वाहनों का वहां जाना असंभव था। ऐसे में रेस्क्यू टीमों ने अपनी जान की परवाह न किए बिना कठिन और जोखिम भरे पहाड़ी रास्तों पर मीलों पैदल यात्रा की। भारी उपकरणों के साथ जवानों ने दुर्गम ढलानों को पार किया और आखिरकार 24 घंटे के कड़े संघर्ष के बाद दुर्घटनास्थल पर पहुँचे।
क्षत-विक्षत थे शव, तस्वीरों में दिखा जोखिम
घटनास्थल पर पहुँचने वाली टीमों को बेहद हृदयविदारक दृश्यों का सामना करना पड़ा। हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले पायलट और पाँचों यात्रियों के शव क्षत-विक्षत अवस्था में बरामद किए गए। वायरल हुई और सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस प्रकार जवानों ने अपनी सुरक्षा को ताक पर रखकर गहरी खाइयों और मलबे के बीच से अत्यंत सावधानी के साथ शवों को बाहर निकाला।
जोशीमठ से एम्स ऋषिकेश तक की प्रक्रिया
पार्थिव शरीरों को घटनास्थल से निकालने के बाद एक-एक करके उन्हें कठिन रास्तों से होते हुए सड़क मार्ग तक लाया गया। इसके पश्चात सभी शवों को सुरक्षित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), जोशीमठ पहुँचाया गया। सीएचसी जोशीमठ में कानूनी और चिकित्सकीय औपचारिकताएं (पंचनामा व प्राथमिक परीक्षण) पूरी करने के बाद, सभी छहों पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी (NTPC) हेलीपैड लाया गया। यहाँ से विशेष हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सभी शवों को ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भेजा गया, जहाँ मेडिकल विशेषज्ञों की देखरेख में मृतकों की औपचारिक शिनाख्त की गई। पहचान पुख्ता होने के बाद प्रशासन ने सभी पार्थिव शरीरों को उनके शोकाकुल परिजनों को सुपुर्द कर दिया है।

