हाल ही में एक प्रतिनिधि मंडल जिसमें वस्त्र उद्योग के प्रतिनिधि और निर्यातक शामिल थे, ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। इस बैठक में प्रतिनिधि मंडल ने कपास आयात शुल्क को हटा देने की मांग की, जिससे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके और निर्यात को बढ़ावा मिले।
उद्योग ने बताया कि वर्तमान में लगने वाला आयात शुल्क घरेलू उत्पादकों के लिए चुनौतियां पैदा कर रहा है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता महंगी हो रही है। यह स्थिति वस्त्र क्षेत्र की वृद्धि दर को प्रभावित कर रही है और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रही है। प्रतिनिधि मंडल ने सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाए।
सरकार के अधिकारियों ने इस मांग को गंभीरता से लिया है और कहा है कि इस विषय पर व्यापक परामर्श चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कपास आयात शुल्क हटाने से उद्योग को तत्काल लाभ मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही घरेलू किसानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। इसलिए, सरकार इस प्रकार के निर्णय में सभी हितधारकों की राय ले रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात शुल्क में छूट दी जाती है तो इससे वस्त्र निर्यातक कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा। साथ ही, इससे विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहीं, कपास उत्पादक किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए भी नीति में आवश्यक समायोजन किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्रियों ने बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता के साथ देख रही है और जल्द ही इसके संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा। यह भी बताया गया कि नीतिगत फैसलों के लिए ऐतिहासिक आंकड़ों, बाजार की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है।
वस्त्र क्षेत्र देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसलिए, उद्योग की चिंताओं को समझते हुए, सरकार इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश कर रही है। व्यापार निकाय भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं ताकि सभी पक्षों का संतुलन बना रहे।
अंत में, उद्योग के प्रतिनिधि और सरकार के अधिकारियों ने पारस्परिक समझौते की भावना के साथ इस मुद्दे पर आगे बढ़ने की सहमति व्यक्त की। कपास आयात शुल्क हटाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो, ऐसी उम्मीद है कि इससे वस्त्र उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और देश का निर्यात भी बढ़ावा पाएगा।

