बर्मिंघम एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, तेज हवाओं के बीच रनवे से फिसला यात्री विमान

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • इटली के वेनिस से बर्मिंघम पहुंचा था जेट2 एयरलाइन का विमान, लैंडिंग के दौरान घास वाले हिस्से में फिसला
  • स्टॉर्म बोएलो की तेज हवाओं से बिगड़ा विमान का संतुलन, पायलट की सूझबूझ से सभी यात्री सुरक्षित

    बर्मिंघम। बर्मिंघम एयरपोर्ट पर एक बड़ा विमान हादसा होते-होते बचा, जब जेट2 एयरलाइन का एक यात्री विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया। यह घटना उस समय हुई जब विमान इटली के वेनिस मार्को पोलो एयरपोर्ट से अपनी नियमित उड़ान पूरी कर बर्मिंघम पहुंच रहा था। विमान में कई यात्री सवार थे, जिनकी जान पायलट की सूझबूझ और कुशलता के कारण बाल-बाल बची।
    रिपोर्टों के अनुसार, उस दिन ब्रिटेन में स्टॉर्म बोएलो का व्यापक असर था, जिसके कारण पूरे क्षेत्र में तूफानी हवाएं चल रही थीं। हवा के झोंकों की रफ्तार लगभग 54 किलोमीटर प्रति घंटा (29 नॉट) तक पहुंच रही थी, जिसने विमान को उतारने के कार्य को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था। माना जा रहा है कि इन्हीं तेज हवाओं के कारण बोइंग 737-800 मॉडल के इस विमान का लैंडिंग के दौरान अलाइनमेंट बिगड़ गया और वह नियंत्रण खोने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हालात बेहद नाजुक थे, जब विमान रनवे पर हिचकोले खाते हुए तेजी से बाईं ओर फिसल गया और सीधे घास वाले ग्राउंड तक पहुंच गया। विमानन की भाषा में इस प्रकार की घटना को रनवे एक्सकर्शन कहा जाता है। हालांकि, पायलट ने इस अत्यंत संकटपूर्ण स्थिति में भी अद्भुत सूझबूझ और असाधारण कुशलता का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करते हुए विमान को कुछ ही देर में वापस नियंत्रण में ले लिया और उसे सुरक्षित रूप से रनवे पर लाने में सफल रहे। यह पायलट की त्वरित प्रतिक्रिया और उनके उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण का ही परिणाम था कि एक संभावित गंभीर दुर्घटना टल गई। इस नाटकीय घटना के बाद बर्मिंघम एयरपोर्ट पर काफी गहमागहमी और चर्चा का माहौल रहा, लेकिन सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई और विमान को भी कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। इस प्रकार की रनवे एक्सकर्शन घटनाओं में मौसम की स्थिति, रनवे की हालत, विमान की गति और लैंडिंग के दौरान पायलट का नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह घटना एक बार फिर हवाई यात्रा में अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रोटोकॉल की सख्त आवश्यकता और विशेषकर खराब मौसम में पायलटों के उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करती है। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो पाएगी।

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