मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस, विधायकों और अधिकारियों को नेवा की ट्रेनिंग

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • विधायकों के सवाल और सरकारी जवाब होंगे ऑनलाइन, 28 अक्टूबर से प्रशिक्षण
  • शीतकालीन सत्र से पहले विधानसभा में डिजिटल व्यवस्था की तैयारी, 50-50 के बैच में ट्रेनिंग

    भोपाल। विधानसभा में अब विधायकों के सवाल लगाने से लेकर सरकारी विभागों के जवाब तैयार करने तक की प्रक्रिया डिजिटल करने की तैयारी है। मध्य प्रदेश विधानसभा की नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) व्यवस्था में सिर्फ विधायकों को ही नहीं, बल्कि उनके निजी सहायकों और सरकारी विभागों की विधानसभा शाखाओं के अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। मकसद यह है कि सदन में उठने वाले सवालों और नोटिस पर कार्रवाई कागजों के बजाय ऑनलाइन हो और विधानसभा सचिवालय, विधायक कार्यालयों तथा विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान बने। इसके लिए 28, 29 और 30 अक्टूबर को विधानसभा परिसर में प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। मंत्रियों को छोडक़र अन्य विधायकों को 50-50 के बैच में ट्रेनिंग दी जाएगी। उनके साथ विधानसभा का काम देखने वाले पीए और अन्य कर्मचारी भी नेवा का इस्तेमाल सीखेंगे। दिसंबर में संभावित शीतकालीन सत्र से पहले यह तैयारी की जा रही है।
    नई व्यवस्था में विधायकों को सवाल जमा करने, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल के नोटिस भेजने, सदन की कार्यसूची देखने और संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन हासिल करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। वहीं, सरकारी विभागों के नोडल अधिकारियों को विधायकों के सवाल और नोटिस प्राप्त करने, संबंधित शाखाओं से जानकारी जुटाने, जवाब तैयार कराने और डिजिटल माध्यम से भेजने का प्रशिक्षण मिलेगा। अभी विधानसभा से जुड़े प्रश्नों के जवाब तैयार करने में विभागों की अलग-अलग शाखाओं के बीच समन्वय की जरूरत होती है। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। इससे दस्तावेजों के आदान-प्रदान और जवाबों की स्थिति जानने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेवा परियोजना की रिपोर्टेड लागत 29.85 करोड़ रुपए बताई गई है। यह केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत संसदीय कार्य मंत्रालय की पहल है। इसके माध्यम से विधानसभाओं की कार्यवाही, प्रश्न, जवाब, विधेयक, नोटिस और अन्य संसदीय दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।
    नेवा का प्रशिक्षण केवल तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगा। विधायकों और उनके सहायकों को संसदीय कामकाज से जुड़ी डिजिटल प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। इसमें प्रश्न और नोटिस ऑनलाइन जमा करना, कार्यसूची देखना तथा विभागों से प्राप्त जवाबों और जरूरी दस्तावेजों तक पहुंचना शामिल है। विधायकों के पीए की भूमिका भी अहम होगी, क्योंकि उन्हें रोजमर्रा के विधानसभा संबंधी कामों में सहयोग करना होता है। डिजिटल व्यवस्था में उनकी दक्षता से सवालों और नोटिस को समय पर ऑनलाइन जमा करने तथा संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
    नेवा लागू होने से सरकारी विभागों की विधानसभा शाखाओं को भी अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा। नोडल अधिकारियों को डिजिटल प्रणाली पर सवालों और नोटिस की जानकारी संभालनी होगी। जवाब तैयार कराने के लिए संबंधित विभागीय शाखाओं से समन्वय और विधानसभा सचिवालय तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा सकेगी। इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य विधायकों के सवालों और विभागों के जवाबों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है। हालांकि, इससे जवाब मिलने में कितनी तेजी आएगी और कागजी प्रक्रिया कितनी कम होगी, यह विभागों में प्रणाली के वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।
    विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 से 26 दिसंबर के बीच आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में होने वाला प्रशिक्षण नई व्यवस्था को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल से जुड़ी प्रक्रियाओं में विधायकों तथा विभागों के बीच लगातार संवाद की जरूरत होती है। नेवा के सार्वजनिक पोर्टल पर आम नागरिक भी उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेज, प्रश्न, सरकारी विधेयक, सदस्यों की जानकारी और समिति की रिपोर्ट देख सकेंगे। इससे सदन में उठाए गए मुद्दों और सरकार के जवाबों तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि, सुरक्षित लॉगिन के तहत उपलब्ध सभी आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होंगे। नई व्यवस्था का लक्ष्य विधानसभा को पेपरलेस बनाना है। लेकिन कागज का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने के लिए जरूरी होगा कि विधानसभा सचिवालय, विधायक कार्यालयों और सभी संबंधित सरकारी विभागों में डिजिटल प्रणाली नियमित रूप से अपनाई जाए।
    नेवा के सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी विधानसभा से जुड़ी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियां देख सकेंगे। इनमें सदन में रखे गए दस्तावेज, प्रश्न, सरकारी विधेयक, सदस्यों से संबंधित जानकारी और समिति की रिपोर्ट जैसे रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। इससे नागरिकों को अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सदन में उठाए गए सवालों और सरकार के जवाबों की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि, विधायकों और अधिकृत अधिकारियों के सुरक्षित लॉगिन से उपलब्ध सभी आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होंगे। नेवा का लक्ष्य विधानसभा की कार्यवाही में कागज के इस्तेमाल को कम करना और प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना है। सवाल, नोटिस, विधेयक और अन्य संसदीय दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होने से कामकाज अधिक व्यवस्थित हो सकता है। लेकिन विधानसभा का कामकाज पूरी तरह पेपरलेस कब होगा, यह संबंधित प्रक्रियाओं के डिजिटल रूपांतरण और विधायकों, सचिवालय तथा विभागों की नई प्रणाली अपनाने की गति पर निर्भर करेगा।

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