DRDO की बड़ी कामयाबी! अब पानी के भीतर लंबे समय तक रह सकेंगी भारतीय पनडुब्बियां

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • स्वदेशी एआईपी सिस्टम के परीक्षण का अगला चरण शुरू, 2027 में कलवरी क्लास पनडुब्बी में लगाने की तैयारी
  • नई तकनीक से पनडुब्बियों की पानी के भीतर रहने की क्षमता बढ़ेगी, दुश्मन के लिए उनका पता लगाना होगा मुश्किल

    नई दिल्ली। भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी क्षमताओं को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम के विकास में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। इस सफलता से भारतीय नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बियां पानी के भीतर अधिक समय तक काम कर सकेंगी। यह नई तकनीक चीन और पाकिस्तान जैसे भारत के प्रतिद्वंद्वियों के लिए समंदर में इन पनडुब्बियों का पता लगाना काफी मुश्किल बना देगी।
    यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एआईपी तकनीक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को पानी के भीतर बिजली पैदा करने में सक्षम बनाती है। सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियां चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह पर आना या स्नॉर्कल के जरिए वायुमंडलीय हवा हासिल करनी पड़ती है, जिससे उनके पकड़े जाने का जोखिम बढ़ सकता है। एआईपी सिस्टम इस निर्भरता को कम करता है, जिससे पनडुब्बी अपनी बैटरी की ऊर्जा पर ही निर्भर रहने के बजाय पानी के भीतर अतिरिक्त बिजली पैदा कर सकती है। नतीजतन, उसकी अंडरवॉटर एंड्योरेंस यानी पानी के अंदर लंबे समय तक ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ जाती है।
    गुजरात के हजीरा स्थित लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में 24 अक्टूबर को इस स्वदेशी सिस्टम के एनर्जी मॉड्यूल के सेटिंग टू वर्क फेज-2 (एसटीडब्ल्यू-2) की शुरुआत की गई। डीआरडीओ की नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (एनएमआरएल) द्वारा विकसित इस मॉड्यूल का अब बिजली उत्पादन के लिए चालू करके भारतीय नौसेना के तय मानकों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। योजना है कि परीक्षण और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, इस एनर्जी मॉड्यूल को 2027 की शुरुआत में मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को सौंपा जाए, जहां इसे कलवरी क्लास की पनडुब्बी में फिट करने की तैयारी है। भारत ने प्रोजेक्ट-75 के तहत मझगांव डॉक में फ्रांसीसी स्कॉर्पीन डिजाइन पर आधारित कलवरी क्लास की छह पनडुब्बियां बनाई हैं। इन पनडुब्बियों में स्वदेशी एआईपी सिस्टम को लगाने का उद्देश्य उनकी पानी के भीतर टिके रहने की क्षमता को और बढ़ाना है, जो भारत की समुद्री रणनीति के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा।

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